बगड़ावतों का शक्तिपीठ: जयमति मंदिर

 बगड़ावतों का शक्तिपीठ: जयमति मंदिर सवाईभोज आसींद 




 


 बगड़ावत गाथा के ऐतिहासिक स्थल सवाई भोज मंदिर के पास प्रेमसागर की पाल पर स्थित रानी जयमति का मंदिर। यह भीलवाड़ा जिले की आसींद तहसील मे खारी नदी किनारे स्थित है। जयमति नव दुर्गा का अवतार है। रानी जयमति और सवाईभोज के सात्विक प्रेम और सच्ची निष्ठा का प्रतीक यह प्रेम सागर है। इसी तालाब के किनारे रानी जयमति सवाई भोज के साथ सती हुई । हिलोरे लेता यह तालाब और तालाब किनारे स्थित मंदिर उनके सच्चे प्रेम की दास्तां प्रकट करता है। नवरात्रि में यहां विशेष पूजा अर्चना की जाती है । परंपरा अनुसार सवाई भोज मंदिर के महंत वर्ष में दोनों नवरात्र के दिनों में माता रानी के मंदिर समक्ष उपस्थित रहते हैं। वहीं रहकर नौ दिन तक माता रानी की आराधना करते हैं तथा अपना धाम नहीं छोड़ते हैं। यह स्थान बगड़ावतों का शक्तिपीठ तथा आस्था का प्रतीक है। यहा भक्ति, शक्ति और नीति की त्रिवेणी प्रवाहित है।

No comments:

Post a Comment

किसानों के मसीहा: विजय सिंह पथिक

  डाॅ.अरुणा गुर्जर  व्याख्याता, भीलवाड़ा यश वैभव सुख की चाह नहीं, परवाह नहीं, जीवन न रहें, यदि इच्छा है, तो यह है जग में स्वेच्छाचार दमन ना ...