देव जी की गोल
भगवान देवनारायण के भक्त देवनारायण जी के नाम की गोल धारण करते हैं। गोल तांबे से बनी एक अंगूठी है। जो अनामिका अंगुली में धारण की जाती है। मेवाड़ में इसकी खास मान्यता है। यह मान सम्मान और प्रतिष्ठा का प्रतीक है। भक्त भगवान देवनारायण के नाम से तांबे के तार से 3 बार घूमाकर रिंग जैसी आकृति वाली एक अंगूठी धारण करते है। अधिकांशतः परिवार के सबसे बड़े व्यक्ति को गोल पहनाई जाती है। इसकी धार्मिक मान्यता है । गोल पहनने वाले व्यक्ति को अपने जीवन में कुछ प्रण लेने होते हैं और उनका पालन आजीवन करना पड़ता है ।
सभी समाज के लोग भगवान देवनारायण में आस्था रखते हैं और उनके नाम से गोल धारण करते हैं। गोल धारण करने की परंपरा सबसे पहले कहां से शुरू हुई ? किस प्रकार शुरू हुई? इसकी कोई प्रामाणिक जानकारी नहीं मिलती है। लेकिन यह मान्यता है की भगवान देवनारायण ने ही अपने भक्तों के धर्म सुधार हेतु गोल पहनने की परंपरा शुरू की थी। भगवान देवनारायण आयुर्वेद और ज्योतिष शास्त्र के ज्ञाता थे । उन्होंने शारीरिक और मानसिक पीड़ा को समाप्त करने के लिए तांबे का प्रयोग करने पर बल दिया। ऐसी मान्यता है कि भगवान देवनारायण के भक्तों ने उनके नाम से गोल धारण की और उनके आशीर्वाद से जीवन को सफल बनाया। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।
गोल पहनना एक धार्मिक आयोजन है जो भगवान के देवरा या मंदिर पर किया जाता है। धार्मिक अनुष्ठान के बाद प्रातःकाल गोल धारण करने वाले व्यक्ति को भगवान देवनारायण के नाम से तांबे से बनी विशिष्ट अंगूठी पहनाई जाती है। इसके पहनने के बाद वह जीवन में अपनी बुरी आदत को त्यागने का प्रण लेता है और उसे आजीवन पूर्ण निष्ठा से निभाता है। गोल धारण करने वाला व्यक्ति मांस-मदिरा का सेवन नहीं करता है । ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति अपना प्रण तोड़ता है उसे आजीवन कष्ट झेलना पड़ता है। अतः उसे दृढ़ निश्चय करके भगवान के नाम से धारण गोल का मान रखते हुए आजीवन अपने वचनों का पालन निष्ठा पूर्वक करना होता है। जो व्यक्ति भगवान देवनारायण की गोल पहन लेता है उसका जीवन मान, सम्मान और प्रतिष्ठा की त्रिवेणी में बहता है । उस पर भगवान की विशेष कृपा दृष्टि रहती है । वह व्यक्ति समाज में लोकप्रिय होता है और अपने दम-खम से विशिष्ट सम्मान प्राप्त करता है।
भगवान देवनारायण ने तांबा धारण करने पर बल दिया उसके पीछे उनका वैज्ञानिक दृष्टिकोण था। वैज्ञानिक रूप से तांबा सबसे शुद्ध धातु है जो सूर्य व मंगल ग्रह का प्रतीक माना जाता है। तांबा धातु में एंटीबैक्टीरियल व एंटीवायरल गुण होते हैं। यह दिमाग में नकारात्मक विचारों को निकालकर सकारात्मक विचारों का प्रवेश कराता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भी तांबा एक पवित्र धातु है इससे सेहत ठीक रहती है । यह हमें मान सम्मान और प्रतिष्ठा दिलाता है । यश की प्राप्ति होती है। वाणी को नियंत्रित रखता है। बुद्धि को नियंत्रित करता है। पेट दर्द, गले का दर्द ,जोड़ों का दर्द, एसिडिटी, पाचन क्रिया, ब्लड प्रेशर, ब्लड सरकुलेशन के साथ-साथ गुस्से पर नियंत्रण रखता है। हमारी इम्यूनिटी बढ़ाता है। यह हड्डियों को मजबूत बनाता है। जिस व्यक्ति के शरीर में जिंक की कमी है उसे पूरी करता है । एनीमिक लोगों के लिए यह वरदान है। हृदय से संबंधित रोगों को दूर करता है । नींद के विकारों को ठीक करता है। व्यक्तित्व सुधार के लिए तांबा एक सबसे श्रेष्ठ धातु है। त्वचा के संपर्क में आने से त्वचा चमक युक्त बनती है। यह इम्यूनिटी सिस्टम को बढ़ाता है । हिमोग्लोबिन बनाने वाले एंजाइम को बढ़ाता है। शरीर के पित्त व वात को भी नियंत्रित करता है। तांबा न केवल शारीरिक रूप से बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी व्यक्ति में बदलाव करता है। मानसिक रूप से मजबूत बनाता हैं ।
तांबा धारण करना अच्छा है । अतः देवनारायण के सभी भक्तों को गोल धारण करनी चाहिए और अपने जीवन की बुराइयों को दूर करने का प्रण लेना चाहिए। भगवान देवनारायण की शिक्षाओं का अपने जीवन में अपनाकर इंसानियत व मानवता का पालन करना चाहिए । नशे से दूर रहकर मानव जीवन को सफल बनाना चाहिए।



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