अथक परिश्रम, जुनून, धैर्य और सफलता का पर्याय: शिक्षित समाज
जमीं पे बैठ के क्या आसमां देखता है ।
परों को खोल जमाना उड़ान देखता है।
न हो उदास हाथ पर हाथ धरे बैठ ।
अपनी मायूसियत को दिल से निकाल।
परो को खोल जमाना उड़ान देखता है ।
लकीरे अपने हाथों की बनाना हमको है आता।
वे कोई और होंगे जो अपनी किस्मत पे है रोते।
परो को खोल जमाना उड़ान देखता है ।
अपने भीतर वो जमीर जिंदा रख।
अपनी काबिलियत का वो तीर जिंदा रख।
परों को खोल जमाना उड़ान देखता है ।
लहरों की तो फितरत ही है शोर मचाने की ।
मंजिल उसी की होती है जो नजरों में तूफान देखता है।
जमी पे बैठ के क्या आसमां देखता है।
परों को खोल जमाना उड़ान देखता है।
गुर्जर समाज के बच्चे आने वाले समाज के भविष्य का आईना है। पढ़े-लिखे नागरिक देश और समाज की वास्तविक पूंजी है। शिक्षा, ज्ञान और बुद्धिमानी के बल से ही हम परिवार समाज और देश को प्रगति के पथ पर ले जा सकते हैं। शिक्षित व्यक्ति समाज की रीड की हड्डी है। जितने व्यक्ति समाज मे शिक्षित होंगे समाज की नींव उतनी ही मजबूत होगी। शिक्षा हमारे ज्ञान को बढ़ाती है, हमारी स्किल अथार्त कला को बढ़ाती है, हमारी पर्सनलिटी अथार्त हमारे व्यक्तित्व का निर्माण करती है ,शिक्षा हमें हर परिस्थिति, समस्या से निपटने हेतु तैयार करती है, हमारे दिमाग और चरित्र को मजबूत करती है, शिक्षा समाज में विशेष दर्जा दिलाने में मदद करती है, खुशहाल जीवन जीने के लिए हमें तैयार करती है, अतः प्रत्येक व्यक्ति शिक्षित बने तथा अपने बेटा और बेटी दोनों को शिक्षित करें, और उन्हें काबिल बनाएं। हम पढेंगे तभी आगे बढ़ेंगे।
प्यारे बच्चों अपने जीवन में लक्ष्य निर्धारित करें। जीवन को दिशा देने के लिए लक्ष्य उतना ही जरूरी है जितना जीने के लिए ऑक्सीजन। विद्यार्थी जीवन चंचलता से युक्त होता है । उस वक्त नए सपने, नए लक्ष्य, नई जिम्मेदारियां हमारे सामने होती है । इस उम्र में भटकाव भी अधिक होता है। इस भटकाव के भी कई कारण हो सकते। कुछ बच्चे गलत लोगो को अपना रोल मॉडल बना लेते हैं। मोबाइल फोन, ऑनलाइन गेम और गेंगस्टर मे व्यस्त हो जाते है।
जिस समय अपने आने वाले जीवन को नई दिशा देने का समय था, सही दिशा मे प्रयास करने का समय होता है, उस समय ये अपना कीमती समय बरबाद करते है। जिसका खामियाजा उनके परिवार, बच्चों और आने वाली पीढ़ी को भुगतना पडता है।
भटकाव होने से कई बार ऐसा होता है कि हम अपने सपनों को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करते हैं। मेहनत करने के बाद भी हमें सफलता नहीं मिलती है तो हम निराश हो जाते हैं। लेकिन हमें कभी निराश नहीं होना चाहिए बल्कि ऐसे समय पर आपको एक बार सिर्फ पूरी ताकत के साथ प्रयास शुरू करना चाहिए। मैंने ऐसा महसूस किया है कि सही मार्गदर्शन नहीं मिलने और सही समय पर सही कार्य न करने से हम लक्ष्य से दूर हो जाते हैं। सफलता के मार्ग में भटक जाते हैं । ऐसे समय में हमें सही मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है । नई ऊर्जा उत्साह, प्रेरणा से हमारा जोश, जुनून दोगुना हो जाता है । अत: हमे एकाग्रचित होकर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जुटना चाहिए।
प्यारे बच्चों जब तक आप अपने अंदर जोश, जुनून, विश्वास के साथ मेहनत करने के लिए धैर्य के साथ तत्पर रहेंगे तो आप दुनिया में हर वो मुकाम हासिल कर सकते हैं जो आप पाना चाहते हैं। दुनिया का प्रत्येक व्यक्ति अपनी योग्यता अनुसार ही चमकता है, इच्छा अनुसार नहीं । अतः इच्छा को योग्यता में बदलना सीखिए।
विद्यार्थी अपने जीवन मे बचपन से ही ऐसी छोटी-छोटी आदतें डाले ।यह छोटी-छोटी आदते ही हमारे जीवन में बड़ा फर्क पैदा करती है । अपने जीवन मे दिल और दिमाग से सोचकर एक लक्ष्य निर्धारित करें। और उसे पाने के लिए छोटी-छोटी आदतें विकसित करें। लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कदम दर कदम आगे बढ़े । अपने में योग्यता विकसित करें। अपनी गलतियों को स्वीकार करना सीखिए। क्या गलती कर रहे हैं उसका विश्लेषण करें । उन्हें दूर करने का प्रयास करें । सफलता का एक मूल मंत्र यह भी है कि आप अपनी गलतियों के साथ-साथ दूसरों की गलतियों से भी सीखे । अगर खुद गलतियां करके सीखोगे तो जिंदगी छोटी पड़ जाए । अपने शिक्षक खुद बने । क्योंकि हम अपने आप को जितना जान सकते हैं दूसरा उतना नहीं जान सकता। अपने शिक्षक बनकर स्वयं को शिक्षा दीजिए । अपने आप को सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए जी जान लगा कर प्रयास करें। दूसरों के विचारों और कुतर्कों से प्रभावित न हो। कुछ करके दिखाना है तो नींद चैन को त्यागों। आप जितना सोचते हो, कोशिशें उससे ज्यादा करो। सपने देखो लक्ष्य बनाओ। इतनी मेहनत करो कि पढ़ाई के आगे हर चीज फीकी लगने लगे। रात को नींद ना आए, सुबह नींद से उठ कर पढ़ने लगो, सुबह के नाश्ते, रात के खाने की फिकर न रहे, यह अनजान किताबे तुम्हें अपनी दोस्त लगने लगे तब समझो कि लक्ष्य को पाने के लिए तैयार हो गए हो।
एक बार खुद पर विश्वास रखकर अपने सपनों को पूरा करने के लिए मन में जुनून रुपी आग लेकर पूरी शक्ति के साथ प्रयास शुरु कर दो ।
कामयाबी आपके कदम चूमेगी। तब समझना कि तुम्हारा समय आने वाला है और तुम्हारे पीछे यह जमाना चलने वाला है। सपने देखो, उन्हे पाने की कोशिश करो, उस मुकाम तक पहुंचो, अपने आपको इतना योग्य बनाओ कि तुम्हारे जैसा बनना भी किसी का सपना बन जाए।
डॉ. अरुणा गुर्जर
व्याख्याता, भीलवाड़ा

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