गुर्जर समाज के प्रेरणास्रोत : श्री लक्ष्मी लाल गुर्जर
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| लक्ष्मी लाल जी और अण्छी देवी दोनो मध्य में तथा गोदी मे प्रीता और पास मे गीता |
जन्म :- 11 अक्टूबर 1931
जन्मस्थान:- झरडू का खेडा, सबलसागर, बदनोर, भीलवाड़ा, राजस्थान।
माता:-कशनी बाई
पिता:-श्री जयराम गुर्जर
पत्नी:-श्रीमती अण्छी देवी
संतान:-
पुत्र-
1.राजेंद्र गुर्जर
2.विष्णु गुर्जर
3.गोपाल गुर्जर
पुत्रिया-
1.गीता गुर्जर
2.प्रीता गुर्जर
3.मधु गुर्जर
शिक्षा दीक्षा:-
11 अक्टूबर 1931 को कांगस परिवार में जयराम जी गुर्जर के साधारण किसान परिवार में श्री लक्ष्मी लाल जी का जन्म हुआ। एक साधारण गरीब परिवार में जन्म लेकर उच्च शिक्षा प्राप्ति तक कठिन परिश्रम किया। बचपन से ही समाज को आगे बढ़ाने के सपने को पूरा करने के लिए शिक्षा की डोर थामी। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने पर भी पढ़ाई की सच्ची लगन के साथ आगे बढ़ते रहे। रियासत काल में शिक्षा की सुविधा नहीं होने के कारण मिडिल बोर्ड की पढ़ाई बदनोर ठिकाने के विद्यालय से प्राप्त की। हाई स्कूल अध्ययन हेतु 27 किलोमीटर दूर भीम के स्कूल में प्रवेश लिया। प्रतिदिन पैदल यात्रा कर पढ़ाई की और अच्छे अंको से उत्तीर्ण किया। बचपन से ही मेधावी, कठिन परिश्रमी श्री लक्ष्मी लाल जी की इच्छा उच्च शिक्षा प्राप्त कर राजकीय सेवा के साथ-साथ समाज सेवा करने की रही। जीवन मे आर्थिक रूप से कई कठिन परिस्थितियां आने पर भी विद्याध्ययन की सच्ची लगन के कारण वह निरंतर शिक्षा की ओर प्रयासरत रहे। पत्नी अण्छी देवी ने पारिवारिक जिम्मेदारियो को बखूबी निभाया। अनपढ़ होते हुए भी उन्होंने कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया और सदैव प्रेरित करती रही। उपकी प्रेरणा से उच्च शिक्षा की प्राप्ति हेतु त्रिभुवन विश्वविद्यालय नेपाल से स्नातक उत्तीर्ण किया । अजमेर राजकीय महाविद्यालय से एल.एल.बी की डिग्री प्राप्त की । राजकीय सेवा में रहते हुए भी स्वयंपाठी विद्यार्थी के रूप में आगे भी अध्ययन जारी रखा। राजकीय सेवा में रहते हुए सभी डिग्रियां प्राप्त करना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
व्यावसायिक जानकारी:-
राजकीय सेवा 1954 से 1976 तक, वकालत 1976 से निरन्तर। राजकीय सेवा में समाज शिक्षा प्रसार अधिकारी, जिला स्तरीय पंचायत प्रसार अधिकारी, राजस्थान गुर्जर महासभा अध्यक्ष 1982 से।
सदस्य, राजस्थान विधानसभा की पुस्तकालय समिति 1990-92, सदस्य कृषि, भेड़, ऊन, मत्स्य, वफ्फ, सैनिक कल्याण विभाग की संसदीय परामर्श दात्री समिति 1991
पारिवारिक जानकारी:-
श्री लक्ष्मी लाल जी गुर्जर के तीन पुत्र और तीन पुत्रियां हैं। उन्होंने सभी को उच्च शिक्षा प्रदान करवाई । उनके परिवार में सभी शिक्षित है । बड़ा पुत्र राजेंद्र गुर्जर है । द्वितीय पुत्र विष्णु गुर्जर एल.एल.बी स्नातक तृतीय पुत्र गोपाल गुर्जर एल.एल.बी स्नातक, नोटरी पब्लिक है। तीनों पुत्रियां राजकीय सेवा में शिक्षिका पद पर कार्यरत हैं तथा उनके परिवार में बच्चों सहित तीन वकील तथा 6 अध्यापिका है तथा अगली पीढ़ी के सभी बच्चे उच्च शिक्षार्जन कर रहे हैं।
विनम्र, कर्मठ, सेवाभावी, ईमानदार, सादगी युक्त सहज सरल व्यक्तित्व के धनी श्री लक्ष्मी लाल जी गुर्जर ने समाज के विकास में भागीदारी निभाई। गांधीवादी विचारो से प्रेरित श्री गुर्जर ने अपना पूर्ण जीवन समाज के लिए समर्पित कर दिया। समाज के उत्थान हेतु राजनीति में प्रवेश लिया। राजस्थान गुर्जर महासभा के 1982 में निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए ।
गुर्जरों के गांधी माने जाने वाले श्री लक्ष्मी लाल जी गुर्जर ने अपना संपूर्ण जीवन समाज की जागृति का विकास के लिए अर्पित कर दिया । उन्होंने गुर्जर समाज में जागृति लाने, सामाजिक रूढ़ियों को त्यागने, बालिका शिक्षा के उच्चतम प्रयास के साथ-साथ अन्य विषयों पर भी सार्थक पहल की। गुर्जर समाज सुधार कमेटिया बनवाकर समाज मे फैली बुराईयो को दूर करने हेतु कई सभाए की और लोगो को कुरीतियो को त्यागने का प्रण दिलवाया। शिक्षा के लिए प्रेरित किया। जिससे अत्यधिक पिछड़े माने जाने वाले समाज मे भी बदलाव स्पष्ट दिखने लगा है।
पेशे से वकील श्री गुर्जर के सानिध्य वह संरक्षण से ही सवाईभोज स्थल आसींद मे ट्रस्ट का निर्माण हुआ जो देवस्थान विभाग उदयपुर में रजिस्टर्ड है। सवाई भोज मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष होने के नाते उन्होंने इस मंदिर का चहुँमुखी विकास कर उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। वे पिछले 60 वर्षों से सवाई भोज मंदिर की प्रगति व विकास के लिए संघर्ष कर रहे है और उनका जीवन समाज और देवनारायण भगवान की सेवा के लिए समर्पित है। उन्होंने अलग अलग स्थान के निवासी समाज के लोगों द्वारा प्राप्त आर्थिक सहयोग से छात्रावास का निर्माण करवाया। सवाई भोज मंदिर के निर्माण व विकास का यह पहला कदम था। इसी संदर्भ में स्वर्गीय श्री राजेश पायलट, श्री गोविंद सिंह गुर्जर, राजस्थान व भारत के विभिन्न गुर्जर महासभा के अध्यक्ष इत्यादि का ध्यान इस स्थल की ओर आकर्षित करवाया। अपने प्रयास व सभी के सहयोग से सवाईभोज स्थल निरंतर विकास कर रहा है । सवाई भोज मंदिर के ताम्रपत्र अनुसार प्राप्त जमीन को संरक्षित किया । आप ही के प्रयास से सर्वोच्च स्तर की जमीन मंदिर के नाम रजिस्टर्ड हुई। सवाई भोज की मापी की जमीन सवाईभोज बनी, प्रतापपुरा मंदिर की जमीन, बगड़ावत सवाई भोज की जमीन , सभी को ट्रस्ट की देखरेख में लेकर सवाई भोज मंदिर के निर्माण व विकास का सपना साकार किया ।
श्री बीला बाबा एवं टोंक जिले के महानुभाव,अन्य के सहयोग से तीन खण्ड मे सवाई भोज मंदिर के नए मंदिर का निर्माण करवाया। भगवान श्री देवनारायण, श्री सवाई भोज, श्री माता साडू,नौ देवी देवताओं की मूर्ति स्थापना करवा कर प्राण प्रतिष्ठा करवाई। यात्रियों की सुविधा के लिए सराये बनवाई। मंदिर प्रगति के लिए हर संभव कोशिश। इसी संदर्भ में ट्रस्ट की आय के लिए श्री सवाई भोज एवं देवनारायण फिलिंग स्टेशन आसींद की स्थापना करवाई।
भारतवर्ष में श्री सवाई भोज का प्रसिद्ध मंदिर आसींद भीलवाड़ा,राजस्थान में स्थित हैं। इस मंदिर की मापी की विशालता को देखते हुए इसके विकास व प्रगति की बहुत गुंजाइश है। श्री गुर्जर का सपना है कि सवाई भोज मंदिर टूरिज्म डिपार्टमेंट में शामिल हो। यह स्थल देशी विदेशी पर्यटकों के लिए पर्यटन स्थल बने। मंदिर की व्यवस्थाओं को ठीक करने के लिए वित्तीय साधनों के अनुसार प्रयासरत है। उसी के अनुरूप मास्टर प्लान बना कर अध्यक्ष जी विकास के लिए कृत संकल्प है । उन्होंने विकास संबंधी सभी योजनाओं को समय-समय पर लागू किया । उनका प्रयास है कि संचार साधनों के द्वारा इस स्थल की जानकारी सभी तक पहुंचे।
उनका विनम्र समर्पण, सेवा-भाव ईमानदारी, सादगी सभी के लिए एक आदर्श है। उनकी इच्छा है कि गुर्जर समाज अन्य सभ्य समाज की तरह सभ्य व शिक्षित बने। सभी सामाजिक कुरीतियो को त्यागकर आर्थिक और मानसिक उन्नति करे। सवाईभोज मंदिर विकास हेतु 60 वर्ष से निरन्तर निःशुल्क सेवा कर रहे है।उनका सपना है कि समाज के दानदाताओं के सहयोग से सवाईभोज स्थल का चहुँमुखी विकास हो और यह स्थल हिंदुस्तान के गुर्जर समाज का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छी पहचान बनाए।



























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